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भारत सरकार-यूएनडीपी प्रोजेक्‍ट

यूनाइटेड नेशंस डेवलेपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) के कालोबरेशन में गृह मंत्रालय ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आपदा के खतरे से निपटने में वर्ष 2002 से समुदायों को सशक्‍त बना रहा है। यूएनडीपी की सहायता से पूरे देश में समुदायों के साथ मिलकर की गई पहलें आपदाओं से निपटने में समुदाय आधारित तैयारी को सुदृढ़ बनाने में सफल रही हैं। वर्ष 2009 तक इस प्रोग्राम ने भारत के 17 राज्‍यों के 176 बहु आपदा संभावित जिलों में समुदायों को होने वाले खतरों को कम करने की दिशा में काम किया है। इसे एशिया की सबसे बड़ी समुदाय आधारित डीआरएम पहल माना गया।. 

भारत सरकार-यूएनडीपी डीआरएम प्रोग्राम के बाद 26 राज्‍यों, 78 जिलों, और 56 शहरों में डिजास्‍टर रिस्‍क रिक्‍शन प्रोग्राम (2009-2013) लागू किया गया जिसका उद्देश्‍य राष्‍ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 में उल्लिखित आपदा जोखिम न्‍यूनीकरण संबंधी गतिविधियां चलाने के लिए राज्‍य और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और नगर प्रशासनों को सुदृढ़ बनाना था।

इसके बाद, आपदा जोखिम न्‍यूनीकरण (डीआरआर) तथा जलवायु परिवर्तन अनुकूलन (सीसीए) संबंधी प्‍लानिंग फ्रेमवर्कों के शीघ्र कार्यान्‍वयन के लिए सरकार, समुदायों और संस्‍थाओं की क्षमता को बढ़ाने में तकनीकी सहायता प्रदान करने हेतु ‘’आपदाओं और जलवायु परिवर्तन के प्रति संस्‍थागत और सामुदायिक प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाने के लिए भारत सरकार-यूएनडीपी प्रोग्राम (2013-17)’’ लागू किया गया। यह परियोजना 6.235 मिलियन अमेरिकी डॉलर के परिव्‍यय से देश के 10 राज्‍यों में लागू की गई थी।   

इस फ्रेमवर्क कॉलबोरेशन में ‘आपदा तैयारी और शमन के माध्‍यम से शहरी क्षेत्रों में क्‍लाईमेट रिस्‍क मैनेजमेंट’’ से संबंधित एमएचए-यूएसएआईडी और यूएनडीपी पार्टनरशिप प्रोजेक्‍ट को शामिल किया गया था। यूएसए आईडी वित्‍तपोषित घटक के पहले चरण की अवधि 2012 से 2016 तक 4 वर्ष की थी और 8 शहरी क्षेत्र अर्थात् भुवनेश्‍वर, गंगटोक, मुदुरई, नवी मुंबई, शिमला, त्रिवेन्‍द्रम, विजयवाड़ा  और विशाखापट्टनम शामिल थे। इस कॉलेबोरेशन का दूसरा चरण ‘’डेवलपिंग रेजीलेंस सिटीज थ्रु रिस्‍क रिडक्‍शन टु डिजास्‍टर्स एंड क्‍लाइमेट चेंज’’ 2016 में शुरू हुआ जो 2020 में समाप्‍त होगा तथा इसे 6 शहरों अर्थात् नवी मुंबई, शिमला, विजयवाड़ा, विशाखापट्टनम, कटक और शिलांग में लागू किया जा रहा है।